भारत में जमीन या मकान खरीदना किसी भी परिवार के लिए बहुत बड़ा निर्णय होता है। पहले संपत्ति की रजिस्ट्री के बाद नामांतरण कराने में महीनों लग जाते थे। लोगों को राजस्व विभाग के कई चक्कर लगाने पड़ते थे और फाइलों के अटकने की शिकायतें आम थीं। इस लंबी प्रक्रिया के कारण समय और धन दोनों की हानि होती थी। वर्ष 2026 में सरकार ने इस व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है, जिससे रजिस्ट्री और नामांतरण को एक साथ जोड़ दिया गया है।
पुरानी व्यवस्था की समस्याएं
पहले संपत्ति की रजिस्ट्री पूरी होने के बाद खरीदार को अलग से नामांतरण के लिए आवेदन करना पड़ता था। दस्तावेजों की जांच, अधिकारियों की मंजूरी और विभिन्न स्तरों पर प्रक्रिया में देरी के कारण कई बार छह महीने से अधिक समय लग जाता था। इस दौरान भ्रष्टाचार और बिचौलियों की भूमिका भी बढ़ जाती थी। रिकॉर्ड में त्रुटियां या दस्तावेजों के गायब होने की शिकायतें भी सामने आती थीं।
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नई डिजिटल प्रणाली का लाभ
नई व्यवस्था के तहत जैसे ही रजिस्ट्रार कार्यालय में खरीद-बिक्री का दस्तावेज दर्ज होता है, उसी समय भूमि रिकॉर्ड में नए मालिक का नाम अपडेट हो जाता है। रजिस्ट्रार और राजस्व विभाग के डिजिटल डेटाबेस आपस में जुड़े हैं, जिससे जानकारी तुरंत साझा होती है। आधार आधारित पहचान सत्यापन और बायोमेट्रिक प्रक्रिया से फर्जीवाड़े की संभावना कम हो गई है। अब अधिकांश कार्य ऑनलाइन होता है और मानवीय हस्तक्षेप कम हो गया है।
खरीदारों और किसानों को राहत
इस बदलाव से खरीदार को तुरंत कानूनी स्वामित्व का प्रमाण मिल जाता है। बैंक से ऋण लेने या अन्य वित्तीय कार्यों में आसानी होती है। ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों के लिए सही भूमि रिकॉर्ड बेहद जरूरी है, क्योंकि इससे उन्हें कृषि ऋण, बीमा और सरकारी योजनाओं का लाभ मिलता है। उत्तराधिकार के मामलों में भी नामांतरण प्रक्रिया सरल हो गई है।
सावधानी और तैयारी जरूरी
संपत्ति खरीदते समय सभी जरूरी दस्तावेज तैयार रखना आवश्यक है। आधार कार्ड, पैन कार्ड, पुराने कागजात और टैक्स रसीद की जांच पहले कर लें। ऑनलाइन पोर्टल पर संपत्ति का इतिहास देखना भी समझदारी है। केवल आधिकारिक वेबसाइट का उपयोग करें और किसी अनजान एजेंट पर भरोसा न करें।
अस्वीकरण: यह लेख सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। भूमि रजिस्ट्री और नामांतरण के नियम राज्य के अनुसार अलग हो सकते हैं। किसी भी लेनदेन से पहले संबंधित राज्य के आधिकारिक पोर्टल या विभाग से पुष्टि अवश्य करें।


